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👆☝कानपुर के अंडरवर्ल्ड के कई अनसुने राज खोलती एक खबर...
Updated Date:13 Apr 2016 | Publish Date: 13 Apr 2016
Kncuplive :-रईस बनारसी की अगुवाई में फिर उठ खड़ा हुआ जावेद रिंगवाला का डी-13 गैंग!

--------स्टोरी हाईलाइट्स-----

-रईस बनारसी व मोनू पहाड़ी के सुपरविजन में, और मुख्तार अंसारी की सरपस्ती में जैन उर्फ तलहा शफीक फिर से खड़ी कर रहा पिता जावेद रिंगवाला की ‘विरासत’
-सहारा देने की आड़ में रईस और मोनू पहाड़ी ने बढ़ाया अपना गैंग
-रईस की जेल से फरारी के दौरान काम आ रहे हैं डी-13 गैेग के गुर्गे
-तिहाड़ जेल में रहा उन्नाव का बदमाश अल्तमश बना है डी-13 गैंग, रईस बनारसी और मुख्तार अंसारी के बीच का संपर्क सूत्र
-जावेद रिंगवाला के बेटों के अलावा टप्पेबाजों के डी-80 गैंग के शीर्ष गुर्गों और बगाही बाबूपुरवा के पुराने हिस्ट्रीशीटरों का भी बाॅस बन बैठा है जेल से फरार खतरनाक अपराधी रईस बनारसी
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कानपुर। एक वक्त कानपुर और आसपास खौफ का पर्याय रहे डी-13 गैंग के लीडर जावेद रिंगवाला को उसके ही इलाके के बदमाश इजराइल आटेवाला ने मार गिराया था। इजराइल और रिंगवाले के बीच शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में स्मैक के धंधे में बर्चस्व की जंग थी। रिंगवाला की हत्या के बाद उसके बेटे जैन उर्फ तलहा शफीक और हमजा शफीक ने छोटे-मोटे जरायम तो किये लेकिन अपने पिता की तरह जुर्म की दुनिया का बड़ा नाम नहीं बन सके। रिंगवाला के दोनों बेटे और गैंग के पुराने सदस्य इजराइल व उसके साथियों को मारकरी बदला लेने के लिये कसमसाते रहे, लेकिन इजराइल को छू भी ना सके। जुर्म की दुनिया में उनके टिक नहीं पाने का मुख्य कारण था कोई प्राॅपर सुपरविजन नहीं होना। जावेद रिंगवाला की मौत के बाद किसी भी नामी क्रिमिनल ने रिंगवाला के बेटों पर हाथ नहीं रखा। लेकिन अब हर चीज एकदम बदल गई है। बदला लेने के लिये और जुर्म की दुनिया में पिता की तरह बादशाहत कायम करने के लिये अब जैन उर्फ तलहा शफीक और उसके छोटे भाई हमजा को जुर्म के बेताज बादशाहों का साथ मिल गया है। रिंगवाला के बेटों जैन और हमजा को यूपी के दो टाॅप मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स मोनू पहाड़ी और रईस बनारसी ने अपनी शरण में ले लिया है। और अब जेल से फरार चल रहे रईस बनारसी के सुपरविजन में जैन और हमजा अपने पिता के बिखर चुके खतरनाक डी-13 गैंग को फिर से खड़ा कर रहे हैं। नाम भले ही डी-13 गैंग, रिंगवाले के बेटों का हो, लेकिन उनकी सहायता की आड़ में रईस बनारसी और उसके परम मित्र, माती जेल में बंद मोनू पहाड़ी अपने लिये शातिर गुर्गों की जमात खड़ी कर रहे हैं, जिसे वो कानपुर में रहने वाले अपने जानी दुश्मन और मुखबिर माफिया टायसन उफ अयाज से टकराने में इस्तेमाल करना चाहते हैं। 

इस तरह जावेद रिंगवाले का बेटा मिला रईस और मुख्तार अंसारी से...

दरअसल कानपुर के थाना कर्नलगंज के गम्मू खां का हाता निवासी डी-13 गैंग के लीडर रहे जावेद रिंगवाले का बेटा जैन 2007 में मर्डर के चार्ज में जेल चला गया। उसने कथित तौर पर अपनी फूफी के बेटे का ही कत्ल कर दिया था। वो तिहाड़ जेल में रहा। यहां पर उसकी मुलाकात एक शातिर बदमाश अल्तमश से हुई। जेल के उसके साथियों के अनुसार शातिर अल्मश खुद को उन्नाव के एक गांव का मूल निवासी बताता है। सूत्रों के अनुसार यही अल्तमश और उसके कुछ साथियों ने बाहर आने के बाद जैन को रईस और फिर लखनऊ जेल में ले जाकर माफिया डान मुख्तार अंसारी से मिलवाया। 
अल्तमश और रईस जब भी जैन को मुख्तार से मिलवाने ले जाते हैं, उसे तोहफे के तौर पर हजारों रुप्ये का खाने-पीने का सामान और कपड़-लत्ते मुख्तार के लिये ले जाने पड़ते हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इन सबके बदले जैन, रईस और अल्तमश को मिलती है माफिया मुख्तार अंसारी की सरपरस्ती। वहीं मुख्तार इन तीनों को जरायम करके कमाई करने के लिये टारगेट्स भी देता है। कुछ वक्त पहले जैन का भाई, यानि जावेद रिंगवाले का छोटा बेटा लूट के एक मामले में जेेल चला गया था, उस मामले में भी बताते हैं मुख्तार ने जेल से ही उसकी मदद करवाई। बताते हैं कि अपनी फरारी से पूर्व ही रईस बनारसी अल्तमश को साथ लेकर जैन को लगभग 3 बार मुख्तार अंसारी से मिलवा चुका हैं, तारीखों के दौरान और लखनऊ जेल में।
जानकारों के अनुसार रईस और जावेद रिंगवाला के बेटे जैन की मुलाकात को एक साल हो चुका है। इतना ही नहीं, जहां रईस बनारसी जैन के माध्यम से अपने हित के लिये डी-13 गैंग को दोबारा पुनर्जीवित कर रहा है, वहीं वो कानपुर शहर के सुप्त पड़े पुराने शातिरों को बटोर रहा है। जैसे कि अब बाबूपुरवा के मर चुके नामी हिस्ट्रीशीटर रफीक जावा का लड़का शादाब भी उससे जुड़ गया है। वो क्लीन चिट भी है, उसपर अभी तक केवल एक बार शांतिभंग की धाराओं में ही मुकदमा हुआ है। बताते हैं कि साल भर पूर्व बाबूपुरवा में लूट और वसूली के लिये रईस द्वारा गोली चलाकर भागने के कांड में भी रईस का साथ शदाब ने दिया था। 
वहीं थाना कर्नलगंज क्षेत्र से रजिस्टर्ड टप्पेबाजों का सबसे बड़ा डी-80 गैंग भी अब रईस बनारसी की शरण में है। ऐसा इसलिये भी है क्योंकि डी-80 के आका, सबसे शातिर टप्पेबाज शराफत, रियाजत, रेहान आदि सभी जावेद रिंगवाला के हत्यारे इजराइल आटे वाला के पुराने विरोधी हैं और इजराइल को मारने के लिये रईस बनारसी से हाथ मिला चुके जैन के करीबी हैं। कुल मिलाकर अब रईस बनारसी और जेल में बंद मोनू पहाड़ी ही डी-80 और डी-13 जैसे खतरनाक गैंग्स के भी आका बन चुके हैं और इनको एकीकृत करके टायसन उर्फ अयाज के खिलाफ अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं।

बनारसी जेल वैन से नहीं, ढकनापुरवा से हुआ था फरार!!

जानकार ये मानने को कतई तैयार नहीं है कि पूरे दिन ट्रांसपोर्टनगर और ढकनापुरवा में गश्त लगाने वाले कांस्टेबिलों, डायल 100 के स्टाफ सहित कथित तौर पर खुद लगातार गश्त करने वाले ट्रांसपोर्टनगर चैकी इंचार्ज को महीनों ये पता ही नहीं चल पाया कि जेल से फरार, 50 हजार का इनामी, यूपी का मोस्ट वांटेड बदमाश रईस बनारसी मय असलहों और सहयोगियों के उनके ही इलाके के मकान में अपनी प्रेमिका के साथ मौज मना रहा है। या इलाके में उसकी आवाजाही है।
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कुछ रोचक तथ्य...

-माफिया डान मुख्तार अंसारी का गांव है रईस बनारसी की ननिहाल
-रईस बनारसी की खाला ने ही महम्दाबाद में मुख्तार के पिरवार से मिलवा कर रईस को दिलवाया था माफिया से संरक्षण
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बताते हैं कि रईस बनारसी कुछ माह पूर्व जेल से फरार ही हुआ था माफिया डाॅन मुख्तार अंसारी के इशारे पर। मुख्तार ने कथित तौर पर बनारस में बसपा के एक नेता की हत्या की सुपारी ली थी। उस काम को मुख्तार ने रईस बनारसी से अंजाम दिलवाया। अगले दिन अखबारों में छपा था कि बदमाशों ने सरेशाम बनारस में नामी बसपा नेता के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से भून डाला था। बताते हैं कि ये हत्या खुद रईस बनारसी ने अपनी इटालियन पिस्टल से की थी। उसके साथ डी-13 गैंग, यानि कि जैन के साथी थे। 

बनारस में हत्या करके लौटा ‘ढकनापुरवा’

हत्या करने के बाद रईस बनारसी गुर्गों के साथ तुरंत वापस कानपुर आ गया था। क्योंकि यहां कानपुर में, बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर ढकनापुरवा इलाके में उसके छिपने और रहने के लिये उसके कई छुटभैया पत्रकार साथियों और खैरख्वाहों ने बढि़या इंतजाम कर रखे थे। ढकनापुरवा के यही खैरख्वाह रईस बनारसी के लिये बाबूपुरवा में चैकी और थाने के स्तर पर पुलिस को मैनेज करते थे। बाकायदा इसी ‘मैनेजमेंट’ के लिये रईस यहां-वहां से उगाही करके अपने इस स्थानीय सहयोगियों को मोटी रकम देता था। 
पुलिस और खुफिया ने वर्क आउट करके पता लगाया कि बनारसी ढकनापुरवा में जिस बुजुर्ग के घर रहता था, उसी की बेटी परवीन -बदला नाम- से उसका लव अफेयर है। जबकि ये तक बताया जा रहा है कि बनारस की एक हिंदू लड़की से हाल में ही क्रिमिनल रईस को एक बेटा पैदा हुआ है। 
रईस के जेल से भागने के बाद ही कई सूत्रों से सीधे पुलिस अधिकारियों को ये सूचनायें मिलती रहीं कि रईस बनारसी कानपुर के बाबूपुरवा थाना के ढकनापुरवा में फलाने के मकान में रह ाहा है, वो कभी कभार आसपास के मकानों में भी रहकर वापस अपनी प्रेमिका के पास ही ढकनापुरवा में रहने आ जाता है। ये तक समाचार पत्रों में छप गया कि उक्त इलाके में किस तरह के और कौन-कौन लोग प्रेमिका के कमरे पर ठहरे बनारसी के लिये बिरयानी लेकर जाते हैं, कौन क्रिमिनल्स झकरकटी पुल के नीचे से रईस को कारतूस और उसके साथियों को देसी असलहे सप्लाई करते हैं। ढकनापुरवा में कौन-कौन छफटभैये ट्रांसपोर्टरों से वूसली करवा के रईस के पहुंचाते हैं, वहां रईस को मूवमेंट के लिये कौन कौन से वाहन उपलब्ध करवाये गये हैं आदि पूरी सूचनायें सूत्रों के अनुसार कानपुर पुलिस के पास थीं, लेकिन पता नहीं क्यों कार्रवाई करने में पुलिस ने इतनी देर लगाई कि वो शातिर यहां से आराम से निकल गया। पुष्ट सूत्रों के अनुसार रईस को पकड़ने से पुलिस इसलिये महरूम रह गई क्योंकि बाबूपुरवा स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के कारण कई बातों की पुष्टि अधिकारीगण नहीं कर सके। चैकी स्तर पर रईस के स्थानीय गुर्गों, दलालों और सहायकों का जाल पुलिस को निष्क्रिय किये रहा।
लेकिन बाद में जब कानपुर पुलिस के अधिकारी हालात को समझकर टाइट हुये और क्राइम ब्रांच ने आदेशों पर सख्ती से जांच करना शुरू किया तो अपनी गर्दन बचाने के लिये रईस बनारसी के वही स्थानीय सहायक, जो उसे रखाये थे, पुलिस के मुखबिर बन गये, और ट्रांसपोर्ट नगर व ढकनापुरवा में वही सो रही स्थानीय पुलिस अचानक जाग उठी। जानकार ये मानने को कतई तैयार नहीं है कि पूरे दिन ट्रांसपोर्टनगर और ढकनापुरवा में गश्त लगाने वाले कांस्टेबिलों, डायल 100 के स्टाफ सहित कथित तौर पर खुद लगातार गश्त करने वाले ट्रांसपोर्टनगर चैकी इंचार्ज को महीनों ये पता ही नहीं चल पाया कि जेल से फरार, 50 हजार का इनामी, यूपी का मोस्ट वांटेड बदमाश रईस बनारसी मय असलहों और सहयोगियों के उनके ही इलाके के मकान में अपनी प्रेमिका के साथ मौज मना रहा है।

चैकी इंचार्ज से मुठभेड़ पर प्रश्नचिन्ह!!

लेकिन फिर इस खबर को लिखे जाने के महज 10 दिन पूर्व ही थाना बाबूपुरवा के ट्रांसपोर्ट नगर चैकी इंचार्ज बीपी रस्तोगी की स्थानीय डिग्गी तालाब के पास कथित तौर पर रईस बनारसी से मुठभेड़ हो गई। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि रईस केवल 9 एमएम या थर्टी की पिस्टलों जैसे सेमी आटोमेटिक हथियार इस्तेमाल करता है। ये बात जगजाहिर है। फिर भी चैकी इंचार्ज बीपी रस्तोगी ने बताया कि बनारसी ने दाड़ी बढ़ा रखी थी, वो आचे जैसी बाइक पर पीछे बैठा था, दूसरा हेलमेट पहने गाड़ी चला रहा था। और रोकने पर रईस ने जैकेट से 315 बोर का देसी तमंचा निकालकर उनपर फायर झोंक दिया। चैकी इंचार्ज ने बयान दिया था कि रईस के ढकनापुरवा में डिग्गी तालाब के पास आने की पुख्ता सूचना मुखबिर ने दी थी, जो मुठभेड़ के समय भी हेलमेट पहने उनके साथ था। 
सभी लोगों चैकी इंचार्ज की इस कहानी पर ये कहकर सवाल उठाये हैं कि ‘‘पहले तो एक साथ दो-दो सेमी आटोमेटिक विदेशी असलहे रखने वाला बनारसी देसी कट्टा क्यों रखे था..?’’फिर जब इतने शातिर अपराधी को ये पता था कि पुलिस उसे खोज रही है तो आखिर उसे पागल कुत्ते ने काटा था जो वो लौट कर कही से आये और ढकनापुरवा में वापस घुस जाये।

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50 हजार का लालच देकर ढकनापुरवा से भागा था रईस

जैसा कि बताया जाता है रईस बनारसी पेशी के बाद पुलिस वैन से शहजहांपुर से बनारस को ले जाया जा रहा था, उसी समय रस्ते में पेशाब करने के बहाने गाड़ी रुकवाकर भाग निकला। लेकिन कुछ विश्वस्नीय पुलिस सूत्रों के अनुसार रईस पेशी पर ले जाने वाले एक हेड कांस्टेबल को ट्रांसपोर्टर से 1 लाख रुपये की वसूली का लालच देकर ढकनापुरवा तक ले आया था। हेड कांस्टेबिल को रईस ने कथित तौर पर रकम को आधा-आधा बांटने, यानि 50 हजार रुपये देने का लालच दिया था। पुलिसकर्मी ने इसलिये भी विश्वास कर लिया क्योंकि रईस उससे कई बार इसी तरह से वसूली के लिये ले जाकर पैसे बांट चुका था। लेकिन इस बार ढकनापुरवा लाकर रईस ने उक्त पुलिसकर्मी को धोखा दे दिया। ढकनापुरवा में कथित तौर पर रईस मस्जिद के पास आया। पैसे लेने की बात कहकर मकान के अंदर गया और पीछे के दरवाजे से निकल भागा। दूसरी ओर डिग्गी तालाब के पार रईस के साथी दूसरे कपड़े और बाईक लेकर उसका इंतजार कर रहे थे। फिर रईस वहां से साथियों संग आराम से निकल भागा। मुख्तार अंसारी के इशारे पर उसने कथित तौर पर बनारस जाकर बसपा नेता की हत्या जैसा जघन्य अपराध अंजाम दिया और बीच-बीच में कई जगह से, मुख्यतः ट्रांसपोर्ट नगर के ढकनापुरवा में लौटकर, आराम से वहीं रहकर ट्रांसपोर्टरों से वसूली करता रहा। और पुलिस उसको छू भी सकी। 
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