मुकुल इस देश में फिर कभी पैदा ना होनाये वेदना किसी आम की नहीं बल्कि उनकी है जिनके कंधों पर है सिस्टम की ज़िम्मेदारी।
Updated Date:06 Jun 2016 | Publish Date: 06 Jun 2016
मुकुल इस देश में फिर कभी पैदा ना होनाये वेदना किसी आम की नहीं बल्कि उनकी है जिनके कंधों पर है सिस्टम की ज़िम्मेदारी।

शहीद मुकुल द्विवेदी के साथी अफसर ने लिखा खत, इस देश में फिर पैदा मत होना:-
                                                       लखनऊ:- मथुरा कांड में शहीद हुए दो पुलिस अफसरों एसपी मुकुल द्विवेदी और संतोष कुमार के परिवार को भले सरकार ने 50-50 लाख दे दिए हों, लेकिन इस घटना के पीछे की पॉलिटिक्स के चलते पुलिस फ़ोर्स पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। ये बात दीगर है कि अभी भी पुलिस फ़ोर्स में ऐसे अफसर हैं, जो मुकुल द्विवेदी की शहादत को जाया नहीं देना चाहते और अभी भी जी-जान से अपनी ड्यूटी निभाना चाहते हैं। ऐसे में मुकुल द्विवेदी के साथी अफसर ने फेसबुक पर जो पोस्ट शेयर की है, उससे साफ़ पता चलता है कि मुकुल द्विवेदी के साथ के साथी अफसरों पर उनकी शहादत का कितना गहरा प्रभाव पड़ा है।

पढ़िए क्या शेयर किया है, शहीद मुकुल द्विवेदी के साथी अफसर शशि शेखर सिंह ने:-

आदरणीय मुकुल द्विवेदी मेरे बहुत अच्छे मित्र और सहकर्मी थे मुकुल और मैं अलीगढ में 2007 में हुए दंगे में साथ साथ ड्यूटी कर रहे थे। तब भी कई गोलिया चली थी लेकिन हम दोनों सुरक्षित रहे। ऑफिसर कॉलोनी में मुकुल और मेरा आवास एक साझा चारदीवारी से जुड़ा हुआ था। तब वो सीओ सिटी फर्स्ट थे और मैं सीओ अतरौली। रात को अक्सर हम दोनो एक साथ ही 2:00 बजे भोर ड्यूटी से वापस आते, पहले ठहाके लगाते फिर सोने जाते। मुकुल एक निहायत ही शरीफ, मृदुभाषी, संवेदनशील और भावुक इंसान थे।

शायर भी थे मुकुल:-

मुकुल ने अपने जीवन का सबसे बहुमूल्य समय अपने मासूम बच्चों और पत्नी को नहीं बल्कि पुलिस और समाज को दिया है। मैं गवाह हूँ उनके हाड़तोड़ मेहनत और प्रतिबद्धता का। मुकुल शेरो- शायरी के भी शौक़ीन थे। आम आदमी तो प्यार में शायर बनता है लेकिन हिन्दू मुस्लिम दृष्टिकोण से साम्प्रदयिक शहरों में नियुक्ति से पुलिस वाले शायर बन जाते है। मुकुल दोनों प्रकार से बने हुए शायर थे।

पुलिस की मौत पर जश्न मनाने वालों खुश रहो:-

मुकुल आज हमारे बीच नहीं है। पुलिस की नियति अपने ही लोगो द्वारा मारे जाने की है। पुलिस की मौत पर जश्न मनाने वालों खुश रहो। हम यूँही मुकुल बन कर मरते रहेंगे। मुकुल किसी आतंकवादी या डकैतों से लड़ता हुआ मारा जाता तो हमें गर्व और दुःख होता लेकिन आज शर्म और दुःख है।

विदा मुकुल, अब कभी मत मिलना। और आखिरी बात इस देश में फिर कभी पैदा मत होना।