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ASHUTOSH KIDNAPPING/ RANSOM & MURDER...
Updated Date:18 Jun 2016 | Publish Date: 18 Jun 2016
कानपुर-आशुतोष अपहरण/फिरौती और हत्याकाण्ड

210 घंटे के अॉपरेशन के बाद अंश की राख लेकर लौटी कानपुर पुलिस।

कानपुर। शहर के साउथ सिटी इलाके से 10 दिन पहले फिरौती के लिए अगवा किए गए बैंक मैनेजर के बेटे अंश की तलाश में भारी-भरकम पुलिस बल 210 घंटे तक अॉपरेशन चलाता रहा लेकिन अंततः उसके हाथ निराशा ही लगी। कानपुर की पुलिस अंश की राख लेकर बैरंग वापस लौटी। इससे यूपी पुलिस के हाईटेक होने पर सवालिया निशान भी खड़े होने लगे हैं। पूरे आपरेशन में पुलिस से कई जगहों पर चूक हुई।
8 जून को अपहरण के कुछ घंटे बाद पुलिस ने सर्विलांस के जरिए बदमाशों की लोकेशन को ट्रेस कर लिया था। अपहरणकर्ताओं की लोकेशन कानपुर देहात के सचेंडी समेत कई इलाकों में मिली। 12 टीमें बनाकर एसएसपी शलभ माथुर खुद पूरे मामले को हैंडल करने लगे। इतना ही नहीं अंश की सकुशल बरामदगी के लिए एसएसपी ने कानपुर देहात में ही डेरा डाल दिया। ताबड़तोड़ छापेमारी और दबिश देकर पुलिस ने करीब डेढ़ दर्जन से अधिक मोबाइल और सिम विक्रेताओं के साथ प्रकाश को भी 10 जून की अलसुबह टांग लिया था। प्रकाश के साथ ही पुलिस ने उसके मोहल्ले में रहने वाले सिम विक्रेता बंटी को भी उठाया। अकबरपुर कोतवाली में इंट्रोगेशन के बाद प्रकाश को 10 जून की सुबह ही छोड़ दिया गया लेकिन बाकी को पुलिस बैठाए रही। इस दौरान नौबस्ता के हंसपुरम, पशुपति नगर, यशोदानगर समेत कई जगहों से परिवार के करीबी युवा उठाए गए। तीन दिन तक अपहरणकर्ताओं की लोकेशन बराबर पुलिस को मिलती रही लेकिन उसके बाद लोकेशन मिलना बंद हो गई। इन सब के बाद भी पुलिस की टीमें हर संदिग्ध पर शिकंजा कसने के लिए उन्हें उठाती रहीं। 16 जून की रात पुलिस ने मोबाइल विक्रेता बंटी और सिम कंपनी के सेल्स एक्जीक्यूटिव सर्वेश से जब पुनः इंट्रोगेशन की तो सभी ने बताया कि प्रकाश ने ही तीन सिम लिए थे। इस पर पुलिस अफसरों को माथा ठनक गया। पुलिस ने प्रकाश को हिरासत में लेकर जब सख्ती की तो उसने राज उगल दिया। विशाल, शेरा, रौनक के साथ पुलिस ने प्रकाश की गर्लफ्रेंड संध्या की मां सुनीता को भी दबोच लिया। बयानों की मिलान के लिए पुलिस ने सभी से अलग-अलग पूछताछ की। सभी के बयान करीब-करीब एक से पाए गए। जिसके बाद पुलिस 17 जून की सुबह अभियुक्तों को लेकर डेरापुर थाना क्षेत्र के बिहार घाट चौकी पहुंची। यहां सुबह के 10 बज चुके थे, अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने मुंगीसापुर पुलिया के नीचे जब खोजबीन की तो उसे राख ही मिली। अंश के खोपड़ी की कुछ हड्डियां और बेल्ट का बक्कल भी पुलिस को मिला। जिसके आधार पर शिनाख्त की गई। करीब 210 घंटे के इस बड़े आपरेशन के बाद पुलिस का राख लेकर लौटना कहीं न कहीं उसकी कार्यशैली और हाईटेक होने के बात पर सवालिया निशान भी उठने लगे हैं।
प्रकाश को छोड़ते न तो बच सकती थी अंश की जान

कानपुर। प्रकाश को महज पांच मिनट की पूछताछ के बाद छोड़ना ही पुलिस की सबसे बड़ी चूक रही। पुलिस सूत्रों की मानें तो आपरेशन के दौरान जिस संदिग्ध को भी उठाया गया, उसे छोड़ा नहीं गया लेकिन प्रकाश को क्यों छोड़ा गया ? इसका जवाब तो जिम्मेदार ही दे सकते हैं। माना जा रहा है कि 10 जून की सुबह थाने से छूटने के बाद ही प्रकाश ने गिरफ्तारी के खौफ से बच्चे को मार डालने का प्लान बना उसकी साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं शातिर दिमाग अपहरणकर्ताओं न सबूत मिटाने के लिए अंश के शव को पेट्रोल छिड़क फूंक दिया।