नकली नोट मामले में पूर्व इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी को कोर्ट से मिली जमानत
Updated Date:05 Jul 2016 | Publish Date: 05 Jul 2016
नकली नोट कांड में पूर्व इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी को कोर्ट से मिली जमानत।

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KANPUR CRIME NEWS

➡अभय त्रिपाठी ✍सम्पादक

कानपुर-बाँदा के काँग्रेसी नेता संजीव अवस्थी को 5 साल पहले नकली नोट मामले में फ़साने के मामले में लम्बे अर्से से फरार चल रहे मुख्य आरोपी निलंबित इंस्पेक्टर दिनेश चन्द्र त्रिपाठी ने सोमवार को एस सी/एस टी कोर्ट में सरेंडर,जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया गया था आज मंगलवार को दिनेश त्रिपाठी के अधिवक्ता ने एडीजे एससी / एसटी फरीदुल हक की कोर्ट में जमानत की अर्जी लगायी थी जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए 50-50 हजार के बेल बॉन्ड पर रिहाई के आदेश दे दिए है।

क्या था मामला

बांदा जिले के निवासी कांग्रेसी नेता संजीव अवस्थी को तत्कालीन कलक्टरगंज इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी ने 2 फरवरी 2011 को घंटाघर से गिरफ्तार किया था। इनके साथ बाबूपुरवा निवासी इनका कथित ड्राइवर भी पकड़ा गया। दावा किया गया कि संजीव अवस्थी नकली नोट की सप्लाई देने कानपुर आए थे। सटीक सूचना पर करीब चार लाख रुपये नकली नोट पकड़े जाने का दावा किया गया था। इधर, गिरफ्तारी के समय ही संजीव ने तत्कालीन बसपा सरकार के इशारे पर फंसाने का आरोप लगाकर हड़कंप मचा दिया था। गुडवर्क टीम में इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी, एसआई दिलीप वर्मा, भारत सिंह, कांस्टेबल मोहम्मद हनीफ, रामकरन सिंह, रामबरन सिंह, रमेश चंद्र वैश्य, ब्रजेश बहादुर सिंह और हंसराज सिंह दर्शाए गए।
इधर, जमानत पर जेल से छूटने के बाद कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की। आदेश पर मामले की जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) ने की। उसे कांग्रेस नेता को झूठा फंसाने के साक्ष्य मिले। इसके बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर अभियोग चलाने की अनुमति ली गई। शासन से 2014 में अनुमति मिलते ही
इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ पर 420 - धोखाधड़ी
467 - फर्जी दस्तावेज बनाना
468 - धोखाधड़ी के लिए जालसाजी
471 - फर्जी दस्तावेजों का असली इस्तेमाल करना
489ए - बैंक नोटों की जालसाजी
489बी- जाली नोटों का असली इस्तेमाल करना
120बी- आपराधिक षड़यंत्र। इन धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 
वही ईओडब्ल्यूू द्वारा सभी नौ पुलिस वालों की गिरफ्तारी की हुक्म तहरीरी जारी की दूसरी ओर भनक लगते ही उस समय अकबरपुर (कानपुर देहात) में तैनात इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी जीडी में बीमारी का तस्करा डालकर फरार हो गए। ऐसा ही कानपुर के सनिगवां पुलिस चौकी में तैनात एसआई भारत सिंह, नजीराबाद थाने में तैनात कांस्टेबल रमेश चंद्र वैश्य और बाबूपुरवा थाने में तैनात कांस्टेबल बृजेश बहादुर सिंह ने भी किया था तमाम कोशिश के बाद भी ईओडब्ल्यू टीम किसी का सुराग नहीं लगा सकी है। तब तत्कालीन डीआईजी आर के चतुर्वेदी ने 23 अप्रैल 2014 को इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी को सस्पेंड कर दिया है। तस्करा डालकर भागने की विभागीय जांच भी शुरू की गयी थी।
यही नही फिर इनके खिलाफ विवेचक ने एनबीडब्लू का तामीला 82  कुर्की की नोटिस बाद में 2 मार्च 2015 को फरार इंस्पेक्टर और फर्जी गुडवर्क में पुलिस के गवाह रहे अब्दुल वहाब के घर आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्लू) के अधिकारियों ने कुर्की की कार्यवाही की थी उसके बाद सभी आरोपियो ने एक-एक करके न्यायालय में सरेण्डर कर दिया था और इस समय सभी जमानत में बाहर है लेकिन इंस्पेक्टर लगातार फरार चल रहा था जिसने कल सरेंडर किया था और आज उसे जमानत मिल गयी।

आपको बताते चले ये वही तत्कालीन बाबूपुरवा इन्स्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी है जिन्होंने पिछली बसपा सरकार के कार्यकाल में फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन और अमर सिंह के खिलाफ शिवाकांत त्रिपाठी की शिकायत पर बाबूपुरवा थाने में धोखधड़ी का मुकदमा दर्ज कर सियासी दुनिया में हडक़म्प मचा दिया था।