दिल्ली-कश्मीर घाटी में अशांति के लिये पकिस्तान दोषी-राजनाथ सिंह
Updated Date:22 Jul 2016 | Publish Date: 22 Jul 2016
कश्मीर घाटी में अशांति के लिए पाकिस्तान दोषी: राजनाथ सिंह

राजनाथ ने कहा, ‘आज कश्मीर के हालात को बिगाड़ने में पड़ोसी देश की भूमिका है, उसे नकारा नहीं जा सकता। उसका नाम पाक है लेकिन उसकी सारी हरकतें नापाक हैं।
कश्मीर घाटी में अशांति के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (21 जुलाई) को कहा कि कश्मीरी हमारे अपने लोग हैं जिन्हें बरगलाया जा रहा है। लेकिन हम कश्मीरियत, जम्हूरियत एवं इंसानियत के साथ कश्मीर के हालात को सामान्य बनाएंगे और उसके गौरव एवं शोहरत को बहाल करेंगे। राजनाथ ने कहा कि गैर-घातक हथियारों के रूप में पेलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा जो दो महीने में रिपोर्ट पेश करेगी।
गृह मंत्री ने कहा, ‘आज कश्मीर के हालात को बिगाड़ने में पड़ोसी देश की भूमिका है, उसे नकारा नहीं जा सकता। पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है। उसका नाम पाक है लेकिन उसकी सारी हरकतें नापाक हैं। वह भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।’ कश्मीर की स्थिति पर लोकसभा में नियम 193 के तहत हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए राजनाथ ने कहा कि पाकिस्तान का निर्माण मजहब के आधार पर हुआ था। हम सोचते थे कि मजहब के आधार पर विभाजन के बाद वह शांति से रहेगा। लेकिन भारत में आतंकवाद पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है।
गृह मंत्री ने कहा कि मजहब के आधार पर विभाजन के बाद बना पाकिस्तान एकजुट नहीं रह सका और उसके दो टुकड़े हो गए। धर्म के आधार पर बने इस देश में आज अलग अलग तंजीमें आपस में लड़ रही हैं। खूनखराबा हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘भारत में रह रहे इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों की चिंता पाकिस्तान को करने की जरूरत नहीं है।’ राजनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी की कविता का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को चेताया….. ‘चिंगारी का खेल बुरा होता है, औरों के घर में आग लगाने का सपना, अपने ही घर में खड़ा होता है।’
कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा अधिक सख्ती और पेलेट गन का उपयोग किए जाने के कुछ सदस्यों के सवाल पर उन्होंने कहा कि आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाएगा लेकिन भीड़ से निपटने के लिए गैर घातक हथियारों का उपयोग किया जाता है। पहले आंसू गैस या पानी की बौछार जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘गैर-घातक हथियारों के रूप में पेलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जायेगा जो दो महीने में रिपोर्ट पेश करेगी।’ उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों को अधिकतम संयम बरतने का निर्देश दिया गया है और उन्होंने इस क्रम में स्वयं ही सीआरपीएफ और बीएसएफ के शीर्ष अधिकारी से बात की है। मजबूरी में बल प्रयोग करना पड़े तो गैर-घातक हथियारों का उपयोग किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि इस चर्चा के बाद उनकी यह धारणा और दृढ़ हुई है कि कश्मीर में स्थिति को सामान्य बनाने के मुद्दे पर राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दल एकजुट हैं। कश्मीर में जो कुछ भी हुआ उससे उन्हें और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बहुत पीड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विदेश यात्रा के दौरान स्वयं अपनी तरफ से फोन करके उनसे कश्मीर के हालात के बारे में जानकारी ली। इसके बाद स्वदेश लौटने पर उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर ही सबसे पहली बैठक की।
राजनाथ ने कहा कि उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात कर राज्य की सुरक्षा स्थिति के बारे में कई बार चर्चा की है तथा वह मुख्यमंत्री तथा अन्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए तीन सूत्रों- कश्मीरियत, जम्हूरियत एवं इंसानियत पर ध्यान देने को कहा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री एवं उनकी सरकार भी इन्हीं सूत्रों को ध्यान में रखते हुए कश्मीर मुद्दे का हल निकालने की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि कश्मीर की पहचान कश्मीरियत पर भी जोर देना होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीर मुद्दे के समाधान में हैवानियत का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के कर्मियों के मरने के बाद यदि कहीं जश्न मनाया जाए तो उसको स्वीकार नहीं किया जा सकता। कुछ लोग सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का जश्न मनाने की विकृत सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कश्मीर में जान गंवायी है, उस पर हम सभी को अफसोस है। सिंह ने कहा कि कश्मीर में स्थिति सामान्य बनाने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न दलों के नेताओं से भी बातचीत कर उनसे सुझाव लिए गये। वहां के लोगों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए वह खुद प्रयासरत है।