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#DAVP_की_तानाशाह_नीति_के_विरोध् में लामबन्द हुये पत्रकार।
Updated Date:06 Aug 2016 | Publish Date: 06 Aug 2016
*डीएवीपी की तानाशाह विज्ञापन नीति के विरोध में लामबंद हुए पत्रकार।*

*कानपुर में शहीद क्रांतिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को पत्रकारों ने नमन् करके काली नीति के ख़िलाफ़ चरणबद्ध आन्दोलन किया आरम्भ*

*कानपुर जिलाधिकारी के माध्यम से सूचना एवं प्रसारण मंन्त्री के लिये DAVP 2016 नीति के विरोध् में ज्ञापन सौपा।*

*अभिव्यकित की आजादी पर हमला करने वाली केंद्र सरकार की इस काली नीति की प्रतियों को कलेक्ट्रेट गेट पर जलाकर कानपुर के पत्रकारों ने विरोध् का फूंका बिगुल*

कानपुर-सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी 2016  की नई नीति को लेकर खासकर लघु एवं मध्यम समाचार पत्र संचालको ने कड़ा विरोध जताते हुये शुरू किया आन्दोलन, समाचार पत्र संचालकों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला और केंद्र सरकार की तानाशाही करार दिया है. अखबार संपादकों ने केंद्र से इस नयी नीति को तत्काल समाप्त कर पुरानी नीति को प्रभावी किये जाने की मांग करते हुये कहा जबतक अभिव्यक्ति की आजादी पर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है और कारपोरेट घरानों से जुड़े शीर्ष अखबार संचालकों को लाभ पहुंचाने व लघु एवं मध्यम समाचार पत्र संचालन को ख़त्म करने की कोशिश की गयी है इसलिए हम पत्रकारों ने केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक आन्दोलन छेड़ा है और ये आन्दोलन तबतक समाप्त नही होगा जबतक ये काली नीति वापस नही ली जाती।

ज्ञात हो कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देशन में द्रश्य प्रचार निदेशालय ‘डीएवीपी’ द्वारा 15 जून को एक पत्र जारी किया गया है जिसमें एबीसी और आरएनआई का प्रमाण पत्र 25 हजार प्रसार संख्या से अधिक वाले समाचार पत्रों के लिए अनिवार्य किया गया है। इसके लिए 25 अंक रखे गए हैं। इसी तरह कर्मचारियों के पीएफ अंशदान पर 20 अंक रखे गए हैं। समाचार पत्र की पृष्ठ संख्या के आधार पर 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। स्वयं का प्रिंटिंग प्रेस होने पर 10 अंक और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रसार संख्या के आधार पर फीस जमा करने पर 10 अंक दिए गए हैं। इस तरह 100 अंक का वर्गीकरण किया गया है जो वर्तमान में शीर्ष अखबार संचालकों को छोडकर अधिकाँश लघु एवं मध्यम समाचार पत्र संचालक पूरा ही नहीं कर सकते हैं।...

15 जून को जारी की गई वर्ष 2016 की इस नई नीति से पत्र संचालकों में खासा आक्रोश है. लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाओं व समाचार एजेंसियों के संचालको ने इसे सरकार का षडय़ंत्र करार दिया है तथा इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर कुठारा घात बताया है. इस नयी नीति से आक्रोशित लघु एवं मध्यम समाचार पत्र संचालकों ने इसके खिलाफ सारे देश में व्यापक आन्दोलन छेड़ दिया  है।साथ ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इसी काली नीति के विरोध  में सभी पत्रकारों को एकजुट करने के लिए *DAVP नीति विरोध् मंच UP* का गठन किया गया जो उत्तर प्रदेश के सभी पत्रकार संगठनों और प्रकाशकों का साझा मंच है जिसके नेतृत्व में davp नीति के विरुद्ध आन्दोलन चलाया जा रहा है।

आज इसी आन्दोलन को कानपुर के पत्रकारों ने मॉल रोड नरोना चौराहे पर स्थित स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी पत्रकारिता को आजादी के दीवानों को ताकत देने के साथ ही उसे निष्पक्ष और समाजोपयोगी तेवर देने वाले शहीद क्रन्तिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी जी की मूर्ति को माल्यर्पण करके आरम्भ कर दिया। 

कार्यक्रम की शुरुआत *कानपुर के वरिष्ठ पत्रकार रंजय सिंह* ने विद्यार्थी जी की मूर्ति का माल्यर्पण करके किया उन्होंने कहा की कलम की ताकत हमेशा से ही तलवार से अधिक रही है और ऐसे कई पत्रकार है जिन्होंने अपनी कलम से सत्ता तक की राह बदल दी,गणेश शंकर विद्यार्थी का नाम ऐसे ही पत्रकार में गिना जाता है।
इस अवसर पर *परिक्रमा विचारधारा समाचारपत्र के संपादक अभय त्रिपाठी* ने विद्यार्थी जी को नमन् करते हुए कहा 1913 में "प्रताप" नाम के समाचारपत्र के विद्यार्थी जी संपादक हुए थे उन्होंने अपने पत्र में किसानों की आवाज बुलंद की. ‘प्रताप’ भारत की आजादी की लड़ाई का मुख-पत्र साबित हुआ. कानपुर का साहित्य समाज ‘प्रताप’ से जुड़ गया था और क्रांतिकारी विचारों व भारत की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया था-प्रताप वो समाचारपत्र भी लघु हुआ करता था आज केंद्र सरकार की आँखों में लघु एवं मध्यम समाचार पत्र चुभ रहे है। मित्रो अब समय आ गया है कि हम संचालक एक जुट होकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी 2016 की इस नीति का व्यापक विरोध करें क्योंकि नई नीति जो जारी हुई है उसमें अंकों के आधार पर समाचार पत्र पत्रिकाओं को विज्ञापन सूची में वरीयता क्रम में विज्ञापन देने के लिए चयन करने की बात कही गयी है जो लघु एवं मध्यम समाचार पत्र के संचालको के साथ नियोजित साजिश का सूचक है. उन्होंने कहा कि इस नई विज्ञापन नीति के लागू होने के बाद बड़े राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक समाचार पत्रों को ही अब केंद्र एवं राज्य सरकारों के विज्ञापन जारी हो सकेंगे और लघु एवं मध्यम श्रेणी के समाचार पत्र डीएवीपी की विज्ञापन सूची से बाहर हो जाएंगे. श्री त्रिपाठी ने कहा की चूँकि डीएवीपी को ही देश की सभी राज्य सरकारें भी आधार मानती रही है और डीएवीपी के रेट को ही आधार मानकर समाचार पत्रों को विज्ञापन भी जारी करती रही हैं तथा डीएवीपी के रेट पर ही भुगतान भी होता रहा है ऐसी स्थिति में राज्य सरकारों के विज्ञापन से भी लघु एवं मध्यम समाचार पत्र के संचालक वंचित हो जाएंगे।

लिहाज़ा अब जरूरी हो गया है कि सभी लघु एवं माध्यम समाचार पत्र व पत्रिकाओं के संचालक संगठित होकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देशन में डीएवीपी द्वारा जारी इस नीति का कड़ा विरोध करें और आगामी 8 अगस्त को दिल्ली के जन्तर-मंतर में पहुँच सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराये क्यों की हमारी एकजुटता ही हमारी ताकत है।
टीम वर्क के संपादक मयंक शुक्ला ने कहा की डीएवीपी द्वारा जिस तरह की नई विज्ञापन नीति जारी की गयी है उससे स्पष्ट है कि मौजूदा केंद्र सरकार देश के 90 फ़ीसदी लघु एवं मध्यम श्रेणी के भाषाई समाचार पत्र पत्रिकाओं ख़त्म कर देना चाहती है। जिसका हम जब तक विरोध् करँगे जब तक नीति वापस न हो जाये।

 शहर दायरा के सम्पादक अभिषेक त्रिपाठी ने कहा कि डीएवीपी ने जो नई अंकीय व्यवस्था लागू की है उसके बाद लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाओं को केंद्र एवं राज्य सरकारों के विज्ञापन भी मिलना संभव ही नहीं होगा।

अभिकथन के सम्पादक नीरज तिवारी ने कहा कि 25 हजार से ऊपर प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों को 30 जून तक नई विज्ञापन नीति के अनुरूप ऑनलाइन जानकारी भरने को कहा गया है तथा यह भी कहा गया है कि जिन समाचार पत्र पत्रिकाओं को 45 अंक से कम प्राप्त होंगे, उन समाचार पत्र पत्रिकाओं को विज्ञापन सूची से पृथक किया जा सकता है।जो सरासर अन्याय है।

वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश दीक्षित ने अखबार संचालकों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए इस नयी नीति को वापस लिए जाने व पुरानी नीति को प्रभावी करवाने हेतु शीघ्र ही निर्णायक कदम उठाये जाने पर जोर देते हुए कहा कि इस लड़ाई को हम विभिन्न पत्रकार संगठनों व समाचार पत्र संचालको का एक संयुक्त मोर्चा बनाकर लड़ने की आवश्यकता है।

जन सामना के संपादक ने कहा कि नयी डी ए वी पी की इस नयी नीति में मात्र तीन समाचार एजेंसी को मान्यता दी गयी है जबकि पिछले 10 वर्षों से भी ज्यादा समय से भाषाई न्यूज़ एजेंसियां बड़े पैमाने पर काम करती चली आ रही हैं तथा उनकी सेवाएं भी हजारों समाचार पत्र संचालक ले रहे हैं। लघु एवं मझोले समाचार पत्र संचालको की भांति भाषाई न्यूज़ एजेंसियों को भी इस नई नीति में अनदेखा किया गया है और तो और 6000 से 75000 की प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों के लिए अभी तक सीए (चार्टर्ड एकाउन्टेंट) का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य था नई नीति में 25000 से 75000 तक के समाचार पत्रों को एबीसी अथवा आरएनआई से प्रसार संख्या प्रमाणित कराने की अनिवार्यता रखी गई है मात्र 15 दिनों के अंदर यह प्रमाण पत्र प्राप्त कर पाना किसी भी समाचार पत्र संचालक के लिए यह आसान नहीं है।

नगर छाया के उप सम्पादक अजय त्रिपाठी ने कहा कि एबीसी और आरएनआई के लिए भी हजारों समाचार पत्रों की प्रसार संख्या का ऑडिट कर पाना संभव भी नहीं है उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में जान-बूझकर इस तरीके के प्रावधान रखे गए हैं जो लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों द्वारा न तो पूरे किए जा सकते हैं ना ही उन पर लागू होते हैं  ऐसी स्थिति में नए नियमों में 25000 से 75000 संख्या वाले समाचार पत्रों को 25 से 30 अंक मिलना भी संभव नहीं होगा जब कि डीएवीपी ने न्यूनतम 45 अंक अनिवार्य किया है. इस नयी नीति का लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों द्वारा व्यापक विरोध किया जाना चाहिए क्योंकि यह नीति अभिव्यक्ति की आजादी पर अब तक का सबसे बड़ा आघात है।

वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब मीडिया जगत में भी कारपोरेट घरानों को लाभ देने का यह एक सुनियोजित षडयंत्र है. जिस तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर विज्ञापन देकर सरकारों ने अपना नियंत्रण कर लिया है उसी तरह सरकार अब प्रिंट मीडिया को भी नियंत्रित करने के लिए भाषाई अखबारों को समाप्त करने का षड्यंत्र रच रही है लेकिन सरकार के इस मंसूबे को समाचार पत्र संचालक पूरा नहीं होने देंगे क्योंकि समाचार पत्र संचालको के साथ साथ इस नीति के लागू होने से देश के लाखों  पत्रकारों  के समक्ष भी बेरोगारी की स्थित उत्पन्न हो जायेगी। 

गणेश चौक पर पत्रकारों के सम्बोधन के बाद सैकड़ो की संख्या में पत्रकारों ने कानपुर कलेक्ट्रेट पहुँच कर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंन्त्री वैकेया नायडू को सम्बोधित ज्ञापन एसीएम-5 को सौपा गया उसके बाद कलेक्ट्रेट भवन से पैदल मार्च करते हुए सभी पत्रकार गेट पर पहुँचे वहाँ पर केंद्र की तानाशाह डीएवीपी नीति की प्रतियां जलाकर आक्रोश व्यक्त किया साथ ही 8 अगस्त को दिल्ली के जन्तर-मंतर पर भारी संख्या में पहुँचने का आवाहन किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुखरूप से रूपेश अग्निहोत्री संपादक व्यू इण्डिया टाइम्स,भावना सम्राट के संपादक अवधेश मिश्रा,अभिकथन के संपादक नीरज तिवारी,के के साहू संपादक अलर्ट टीम,ब्रम्ह किशोर अवस्थी संपादक ब्रम्ह इन्वेस्टिगेशन न्यूज़,राघवेन्द्र चौहान संपादक नगर संवाद, उमेश कुमार प्रबंध संपादक दैनिक जन एक्सप्रेस,आशीष अवस्थी संपादक मिडिया ब्रेक,संकल्प सिंह सचान सम्पादक पब्लिक रुट, के सी दीक्षित संपादक बिठूर टाइम्स,शरद त्रिपाठी उप संपादक परिक्रमा विचारधारा,गौरव त्रिपाठी संपादक लोक छाया, के के अरोड़ा संपादक पैराडाइस,अक्षन्स चतुर्वेदी प्रबंध संपादक सैनिक सौर्य,चन्दन जैसवाल,अनिल अवस्थी, मो मोमिन, अरुण मिश्रा व्यापार सन्देश,नीरज शर्मा,आशीष त्रिपाठी यूथ पहल,विकास अवस्थी शहर दायरा,चन्द्रशेखर संपादक अपना अभियान,महेश प्रताप सिंह खुलासा टीवी,श्रावण गुप्ता,राजीव मिश्रा, आनंद कुमार मिश्रा, बलवंत सिंह सम्पादक एस आर न्यूज़,अशोक गोयल,लक्ष्मी शंकर यादव,पप्पू यादव,बी पी शाहू समेत अख़बारों के संचालक व सैकड़ो पत्रकार मौजूद रहे।
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