तो आखिर अखिलेश ने कर ही दी पिता के कुनबे से बगावत। बसपा से ज्यादा भाजपा को होगा फायदा
Updated Date:23 Oct 2016 | Publish Date: 23 Oct 2016
तो आखिर अखिलेश ने कर ही दी पिता के कुनबे से बगावत। बसपा से ज्यादा भाजपा को होगा फायदा। =======================
23 अक्टूबर को यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। विधायक दल की बैठक में अखिलेश ने कहा कि जो भी मंत्री अमर सिंह का समर्थक होगा, उसे इसी तरह हटा दिया जाएगा। यह तो अच्छा है कि मुलायम सिंह यूपी में किसी सरकारी पद पर नहीं है, नहीं तो अखिलेश अपने पिता को भी बर्खास्त कर देते, क्योंकि सपा में मुलायम सिंह ही अमर सिंह के सबसे बड़े समर्थक है। यानि अब अखिलेश यादव अपने पिता के कुनबे से बगावत पर उतारू है। मैंने 16 अक्टूबर को जो ब्लॉग लिखा। उसका शीर्षक था  तो क्या अखिलेश यादव अपने पिता के कुनबे से बगावत करेंगे? 16 अक्टूबर को भले ही अनेक लोग मेरे इस विचार से सहमत न हुए हो, लेकिन मात्र 8 दिन बाद वो ही हो रहा है, जो मैंने 16 अक्टूबर को लिखा था। अखिलेश बगावत ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि सपा की राजनीति में सबसे बड़ा कद स्वयं का बता रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज यूपी में समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव ही सबसे ताकतवर नेता नजर आ रहे हैं। जिन लोगों ने सपा की राजनीति को निकट से देखा है वो यह कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि कोई व्यक्ति शिवपाल यादव जैसे नेता को बर्खास्त कर देगा। भले ही मुलायम सिंह लंबे समय तक सीएम रहे, लेकिन सब जानते हैं कि सपा की चाबी शिवपाल के हाथों में थी। मुलायम सिंह के टिकट फाइनल करने के बाद टिकट पर शिवपाल की चांदी की मोहर लगना जरूरी था। ऐसे में किसी विधायक की इतनी हिम्मत नहीं कि वह शिवपाल की ओर आंख उठा कर देख लें। अब शिवपाल को भी इस बात का मलाल हो रहा होगा कि एक बच्चे ने वो हिमाकत की है, जो बड़े भाई मुलायम सिंह सोच भी नहीं सकते। इतना ही नहीं अखिलेश ने बड़ी चतुराई से सपा के दो चेहरे कर दिए। एक मुलायम और शिवपाल वाला, जिसमें बेईमान सत्ता के दलाल, चरित्रहीन जैसे लोग शामिल है, दूसरा स्वयं का चेहरा, जिसमें ईमानदारी से सरकार चलाने वाले हैं। अखिलेश को लगता है कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी के मतदाता उसी को वोट देंगे, जो अखिलेश की पार्टी का उम्मीदवार होगा। अखिलेश ने इस समय सपा के जो दो चेहरे दिखाए हैं, उससे सबसे बड़ा फायदा भाजपा को हो सकता है। यदि चुनाव में सपा के वोट विभाजित होते हैं, तो भाजपा उम्मीदवारों की जीत आसान होगी। इस पूरे मामले में अभी यूपी के ताकतवर मंत्री आजम खान की भूमिका सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि परदे के पीछे आजम खान भी खड़े हैं। आजम खान भले ही सामने न हो, लेकिन अमर सिंह के लिए अखिलेश वो ही कर रहे हैं, जो आजम खान चाहते हैं। 
रामगोपाल भी बर्खास्त
शाम होते-होते सपा अध्यक्ष शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव को पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रवक्ता पद से बर्खास्त कर दिया। साथ ही रामगोपाल को 6 वर्ष के लिए सपा से निलंबित भी कर दिया। शिवपाल ने आरोप लगाया कि रामगोपाल ही सपा में विवाद करवा रहे हैं।  रामगोपाल अभी अखिलेश के खेमे में है और बार-बार पत्र लिखकर मुलायम-शिवपाल पर हमले कर रहे हैं।