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हत्यारा बनाकर पुलिस ने एक साल जेल में रखा और बर्बाद कर दिया करियर, अब बनूंगा जज’
Updated Date:29 Sep 2017 | Publish Date: 29 Sep 2017
हत्यारा बनाकर पुलिस ने एक साल जेल में रखा और बर्बाद कर दिया करियर, अब बनूंगा जज’

कानपुर-दस साल के बच्चे की हत्या में बीसीए छात्र को कानपुर कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र भी लिखा है। यह छात्र बच्चे की हत्या के बाद से ही जेल में था। उसे जमानत तक नहीं मिली थी। वह एक साल जेल में रहा। गिरफ्तारी के समय भी छात्र और परिजन बार-बार कहते रहे कि उसे निर्दोष फंसाया जा रहा है, आला अफसरों से भी गुहार की लेकिन पुलिस ने किसी की नहीं सुनी और उसे ही हत्यारोपी बताते हुए जेल भेज दिया था। अब बरी होने के बाद छात्र ने कहा है कि पुलिस ने उसका करियर बर्बाद कर दिया। उसके जीवन का महत्वपूर्ण एक साल बर्बाद हो गया। अब वह पीसीएस जे की तैयारी करेगा। उसका मकसद जज बनकर लोगों को न्याय दिलाना होगा। 
 
*गली में बरामद हुआ था बच्चे का शव*
20 अगस्त 2016 को कानपुर जूही लाल कालोनी निवासी मेराजुल हक के दस साल के बेटे रेहान का शव मोहल्ले की ही एक गली में बरामद हुआ था। उसका गला रेता गया था। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अधिवक्ता शरद त्रिपाठी और नागेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में किदवई नगर पुलिस ने 30 अगस्त 2016 को साकेत नगर कल्याण जी बेकरी के पास से जूही लाल कालोनी निवासी बीसीए छात्र जय प्रताप सिंह उर्फ मोहित की गिरफ्तारी दिखाई थी। जय प्रताप सिंह गोविंदनगर के एक इंस्टीट्यूट से बीसीए कर रहा था। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताकर उस समय कोर्ट में अर्जी देकर जय प्रताप सिंह के नार्को टेस्ट की मांग की थी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट में अर्जी देकर सीबीआई जांच की भी मांग की गई थी। विवेचक हरी शंकर मिश्रा ने तब हाईकोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने की बात कही थी। इस पर बचाव पक्ष की अर्जी खारिज हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जल्द मामले की सुनवाई की गुहार लगाई तो छह माह में मामले के निस्तारण का आदेश दिया गया था। 
 
*कोर्ट ने जय प्रताप को दोषमुक्त करार दिया*

अधिवक्ताओं ने बताया कि पुलिस ने गंगा बैराज के पास से गोताखोर रामबाबू और मो. निसार द्वारा आलाकत्ल चापड़ बरामद होने की बात कही थी, लेकिन यह दोनों कोर्ट में मुकर गए। उन्होंने विवेचक की बात पर सवालिया निशान लगा दिए थे। पुलिस ने उत्कर्ष और यशराज नामक दो बच्चों को गवाह बनाया था। इन दोनों ने भी कोर्ट में घटना देखने से इनकार किया था। वादी मृतक के पिता मेराजुल हक ने भी कोर्ट में कहा था कि वह जय प्रताप को नहीं जानता। पता नहीं, हत्या किसने की है। गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने जय प्रताप को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने विवेचक हरी शंकर मिश्र के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है।

*छात्र का करियर तबाह, क्लेम मांगेंगे*
दस साल के बालक की हत्या में बरी होने के बाद जय प्रताप के अधिवक्ता नागेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस की लापरवाही से बेकसूर छात्र को एक साल जेल में रहना पड़ा। उसका करियर और जीवन का अहम समय बर्बाद हो गया। इसकी दोषी सीधे-सीधे पुलिस है। अब जय प्रताप को क्लेम दिलाने के लिए कोर्ट में अर्जी देंगे।

*क्लेम के लिए मानवाधिकार आयोग जा सकता*
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह चौहान और शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि दोषमुक्त साबित हुआ छात्र मानवाधिकार आयोग में क्लेम के लिए जा सकता है। विवेचक के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की जा सकती है।

*पिता बोले, शुक्र है कोर्ट से न्याय मिला*
जय प्रताप के पिता भगवान सिंह सेंगर सेना में वारंट अफसर हैं। वे दिल्ली में तैनात हैं। उनका कहना है कि पुलिस जानती थी कि उनका बेटा बेकसूर है फिर भी उसे फंसाया गया। भगवान का शुक्र है कि कोर्ट से न्याय मिला। उनकी पत्नी कृष्णा का एक साल रोते-रोते बीता है। बड़ा बेटा रोहित सिंह और बेटी ज्योति भी मानसिक तनाव से गुजरी। अब वकीलों से क्लेम और दोषी पुलिसकर्मियों को सजा दिलाने के लिए सलाह करेंगे।