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बिहार में दो पत्रकार #नवीन निश्चल और #विनोद सिंह की हत्या और दिल्ली में महिला छायाकार अनुश्री के साथ बर्बरता पर कानपुर जर्नलिस्ट क्लब ने की कड़े शब्दों में निंदा।
Updated Date:28 Mar 2018 | Publish Date: 28 Mar 2018

कानपुर। बिहार के पटना आरा में दो पत्रकार नवीन निश्चल और विनोद सिंह की हत्या और दिल्ली की महिला छायाकार अनुश्री और पत्रकार प्रवीण सिंह के साथ बर्बरता के मामलों लेकर आज मंगलवार को *कानपुर जर्नलिस्ट क्लब* कार्यालय में आपात क़ालीन बैठक बुलाकर कड़े शब्दों में निंदा की गयीं पत्रकारों ने कहा कि समझ में नहीं आ रहा है कि हम एक लोकतांत्रिक देश में हैं या फिर अलोकतांत्रिक देश में जहां पर कही पत्रकारों को माफ़िया,नेता अपराधियों का गठजोड़ पत्रकारों को निशाना बनाकर निर्मम हत्या करवा देता है तो कही पुलिस वाले पत्रकारों के साथ क्रिमिनल जैसा व्यवहार करते हैं। 

*जर्नलिस्ट क्लब के चैयरमैन सुरेश त्रिवेदी* ने कहा कि पत्रकार के एक-एक कतरे खून का अंजाम भुगतेगी सरकारे ।जिस प्रकार से देश में जगह-जगह पत्रकारो पर हमले हो रहे हैं वह दुर्भाग्य है। पत्रकार कभी अपराधियों के निशाने पर होते हैं या कभी नेता के निशाने पर या कभी प्रशासन के निशाने पर चढ़ रहे हैं यह विडम्बना ही कहा जा सकता है । पत्रकारों के साथ घटी घटना है सूबे के सभी पत्रकार पूरी तरह दहशत में है। 

*जर्नलिस्ट क्लब के अध्यक्ष अनुज शुक्ला* ने इन घटनाओं को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए पटना के आरा में  हत्या में शामिल अपराधियों की अविलम्ब गिरफ्तारी की मांग सहित मृतक पत्रकार को अधिक से अधिक आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

*जर्नलिस्ट क्लब के उपाध्यक्ष अभय त्रिपाठी* ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर लगातार हमला हो रहा है। इसके बावजूद सरकारे मूकदर्शक बनी हुई है।पत्रकार की हत्या असहनशीलता की राजनीति का उदाहरण है।आलोचना की आवाजों को दबाने की कोशिश है ।यह हमारे लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुखद क्षण हैं और यह घटना सचेत करती है कि असहिष्णुता और कट्टरता हमारे समाज में अपना सिर उठा रही है । 

*वरिष्ठ पत्रकार गौरव चतुर्वेदी* ने कहा कि सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून अविलंब बनाए तथा पत्रकार के सुरक्षा के लिए गंभीर होकर पत्रकारों को हित में कदम उठाए। पत्रकार के साथ कोई नहीं रहता लेकिन जब अनहोनी घटना घट जाती है तो सरकार भी कुछ रुपए का मुआवजा राशि देकर अपना मुंह बंद कर लेती है ।लेकिन आखिर कब तक चलेगा।

*वही जर्नलिस्ट क्लब के वरिष्ठ मंत्री श्याम तिवारी,सँयुक्त मन्त्री तरुण अग्निहोत्री,नीरज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार गौरी शंकर भट्ट,रितेश शुक्ला, शैलेन्द्र मिश्रा,आलोक अग्रवाल* ने पत्रकारों के साथ हो रही ताबड़तोड़ घटनाओं को लेकर दुख जताया और सभी मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि ये घटनाएँ निंदनीय है।आए दिन पत्रकारों पर हमला हो रहा है जो दुर्भाग्यपूण है। यह सरकारो को सोचना चाहिए पत्रकार के साथ सुरक्षा नहीं है । सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून अविलंब बनाए तथा पत्रकार के सुरक्षा के लिए गंभीर होकर पत्रकारों को हित में कदम उठाए। 
*वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार त्रिपाठी* ने कहा कि पत्रकार के साथ कोई नहीं रहता लेकिन जब अनहोनी घटना घट जाती है तो सरकार भी कुछ रुपए का मुआवजा राशि देकर अपना मुंह बंद कर लेती है । लेकिन आखिर कब तक चलेगा। अन्य पत्रकारों ने भी पत्रकारों के साथ हो रहे घटनाओं को लेकर एक सुर में कड़ी निंदा की।
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